
मसूरी के लक्ष्मणपुरी इलाके में करीब 200 वर्ष पुराने कब्रिस्तान परिसर में बने नमाज स्थल को प्रशासन ने अतिक्रमण बताते हुए ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए। सभी ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया।
इस बाबत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट राहुल आनंद ने बताया कि कब्रिस्तान समिति लंढौर को वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था लेकिन उनके द्वारा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। उन्होंने बताया कि लंढौर कैंट बोर्ड, वन विभाग तथा वक्फ बोर्ड द्वारा इसका निरीक्षण किया गया और उनके द्वारा कहा गया कि यह उनकी संपत्ति नहीं है। वक्फ बोर्ड ने कहा कि यह उनकी भी संपत्ति नहीं है। यह संपत्ति नगर पालिका सीमा में स्थित है और यह पालिका/सरकार की संपत्ति है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जिस ढांचे को प्रशासन ने मस्जिद बताकर हटाया है। वह नियमित नमाज अदा करने वाली मस्जिद नहीं थी। यह एक टीनशेड था। जहां कब्रिस्तान में दफनाने से पहले मृतकों की अंतिम नमाज (जनाजा नमाज) अदा की जाती थी। उनका दावा है कि यह स्थान करीब 200 वर्षों से उनके धार्मिक उपयोग में रहा है और यहां उनके पूर्वज दफन हैं।
एसडीएम के अनुसार प्रशासन की ओर से संबंधित पक्ष को तीन बार नोटिस जारी कर स्वेच्छा से संरचना हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिसों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद नियमानुसार पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।



