
प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान कामों की धीमी प्रगति पर सीएम धामी ने नाराजगी जाहिर की। सीएम धामी ने कार्यदायी संस्थाओं को कामों में तेजी लाने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि, राज्य स्थापना दिवस 9 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन के भीतर परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही इन परियोजनाओं की दोबारा समीक्षा की जाएगी और काम में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रदेश में करीब 50 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें से सरकार ने फिलहाल 6 परियोजनाओं को प्राथमिकता पर रखा है। इनमें सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब दो सबसे बड़े प्रोजेक्ट हैं, जिनका काम आवंटित किया जा चुका है। वहीं काठगोदाम-हनुमानगढ़ी, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, रैथल बारसू-बरनाला और जोशीमठ-औली-गौरसों परियोजनाएं अलग-अलग तैयारी के चरण में हैं। केदारनाथ रोपवे की लंबाई 12.90 किलोमीटर और हेमकुंड साहिब रोपवे की लंबाई 12.40 किलोमीटर बताई गई। मुख्यमंत्री ने दोनों परियोजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि रोपवे परियोजनाओं की प्रगति केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। 9 नवंबर तक काम जमीन पर नजर आना चाहिए। 15 दिन बाद मिलने वाली प्रगति रिपोर्ट के आधार पर इन परियोजनाओं की फिर समीक्षा की जाएगी।




