
प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। जल स्तर घटने से यूजेवीएनएल का उत्पादन कम हुआ है, जबकि केंद्रीय पूल से भी अपेक्षित बिजली नहीं मिल पा रही है।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने बताया कि इस चुनौती की बड़ी वजह जलविद्युत उत्पादन में कमी है। सितंबर में यूजेवीएनएल से पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में औसतन करीब 170 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। नदियों में जल प्रवाह घटने से पीक आवर्स में उत्पादन करीब 1094 मेगावाट से घटकर 912 मेगावाट रह गया है।
शाम के समय ग्रिड फ्रीक्वेंसी करीब 49.50 हर्ट्ज तक गिरने के कारण एनआरएलडीसी ने निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेने यानी ओवरड्रॉल पर भी अंकुश लगाया है। यानी पैसा देकर बिजली खरीदने की तैयारी है, लेकिन बाजार में पीक समय पर पर्याप्त बिजली ही उपलब्ध नहीं है।

