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अडाणी मामले में हंगामा, रिश्वतखोरी के आरोपों को कंपनी ने बताया ‘गलत’

नई दिल्ली। अडाणी ग्रुप को लेकर संसद और बाजार में बुधवार को हलचल रही। विपक्षी दल जहां संसद में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग को लेकर अड़े रहे, वहीं अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने स्पष्ट किया कि गौतम अडाणी, सागर अडाणी और वरिष्ठ अधिकारी विनीत जैन पर रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोप गलत हैं।

अडाणी ग्रीन एनर्जी का बयान
एजीईएल ने स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल एक रिपोर्ट में दावा किया कि अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) ने अडाणी अधिकारियों पर विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (एफसीपीए) के किसी भी उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया है।

कंपनी ने कहा, “डीओजे के अभियोग में गौतम अडाणी, सागर अडाणी और विनीत जैन का नाम रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार के आरोपों में शामिल नहीं है। मीडिया में चल रही खबरें भ्रामक और आधारहीन हैं।”

संसद में विपक्ष का हंगामा
संसद में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अडाणी मामले पर हंगामा किया और जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अडाणी समूह के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “मोदी सरकार ने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेकर मामले को दबाने की कोशिश की है। लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाना जारी रखेगा।”

शेयर बाजार में अडाणी ग्रुप का जलवा
हंगामे और आरोपों के बीच अडाणी ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। समूह की पावर कंपनियों के नेतृत्व में शेयरों ने 20 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की। इस तेजी के साथ अडाणी ग्रुप का कुल मार्केट कैप 1.25 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 12.60 लाख करोड़ रुपये हो गया।

डीओजे और मीडिया रिपोर्टिंग
डीओजे के अभियोग में अडाणी अधिकारियों का नाम केवल काउंट 2 (सिक्योरिटीज धोखाधड़ी साजिश) और काउंट 3 (वायर धोखाधड़ी साजिश) के तहत आया है। अभियोग में किसी भी सरकारी अधिकारी को रिश्वत देने का प्रमाण नहीं है।

एजीईएल ने मीडिया पर गलत और लापरवाह रिपोर्टिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि यह समूह की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं और बाजार में छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।

विपक्ष ने की जांच की मांग
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार से मामले की जांच प्रमुख एजेंसियों से कराने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि अडाणी समूह के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और इनकी जांच आवश्यक है।

यह मामला आने वाले दिनों में संसद और बाजार दोनों में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

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