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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024: उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका, मातोश्री पर लगा ‘फिर उठूंगा’ का पोस्टर

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 का नतीजा शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। उनकी पार्टी केवल 29 सीटों पर सिमट गई, जो अब तक की सबसे खराब परफॉर्मेंस मानी जा रही है। इस हार के बाद उद्धव ठाकरे ने हार मानने से इनकार कर दिया है। उनके आवास ‘मातोश्री’ के बाहर लगे पोस्टरों ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पोस्टर का संदेश?
मातोश्री के बाहर लगे पोस्टर में लिखा है:
“लड़ते-लड़ते भले ही मैं हारा हूं, लेकिन हारने का मुझे दुख नहीं है। यह लड़ाई मेरे महाराष्ट्र के लिए है। लड़ाई का कोई अंत नहीं। महाराष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए मैं फिर उठूंगा और फिर लड़ूंगा। जय महाराष्ट्र।”

यह संदेश उद्धव ठाकरे के संकल्प को दिखाता है कि वह हार के बावजूद अपने संघर्ष को जारी रखेंगे।

हार के बाद चिंतन और इस्तीफों का दौर
विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा।
इस हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
महाविकास अघाड़ी में अब हार के कारणों पर मंथन का दौर शुरू हो गया है।

महायुति गठबंधन की शानदार जीत
महायुति गठबंधन ने 280 में से 230 सीटें जीतकर भारी सफलता हासिल की।
इसके मुकाबले महाविकास अघाड़ी केवल 40 सीटों पर सिमट गई।
महायुति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सबसे अधिक सीटें जीतकर मुख्यमंत्री पद की दौड़ को और दिलचस्प बना दिया है।

सीएम पद को लेकर महायुति में खींचतान
बीजेपी के नेता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री का पद देवेंद्र फडणवीस को दिया जाए।
वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता मुख्यमंत्री के तौर पर एकनाथ शिंदे को ही बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।
शिंदे गुट का कहना है कि यह जीत उनके नेतृत्व में हुए विकास का नतीजा है।

उद्धव ठाकरे की चुनौती
इस चुनावी हार के बाद उद्धव ठाकरे के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। मातोश्री पर लगे पोस्टर यह संकेत देते हैं कि वह हार के बाद भी राजनीतिक लड़ाई के लिए तैयार हैं। उनका संदेश स्पष्ट है कि वह महाराष्ट्र के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

राजनीतिक विश्लेषण
महाराष्ट्र की राजनीति में यह चुनावी परिणाम नए समीकरणों का संकेत दे रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) को अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी होगी, जबकि महायुति में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।

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