गंगोत्री घाटी के हर्षिल में झील बनने से भागीरथी नदी का प्रवाह रुक गया था। अब यमुना घाटी के स्यानाचट्टी में भी गढ़गाड़ में मलबा आने से यमुना नदी में झील बन गई है। जिससे यमुना का प्रवाह रुक गया है। पानी धीरे-धीरे निकल भी रहा है, लेकिन यमुना नदी में झील बनने से स्यानाचट्टी कस्बे का ज्यादातर हिस्सा जलमग्न हो गया है।
झील को सुरक्षित तरीके से खोलने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य, राजस्व, पुलिस, खाद्य आपूर्ति और लोक निर्माण विभाग की टीमें तैनात हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि घबराने की जरूरत नहीं है, प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। ड्रोन की मदद से झील की निगरानी भी की जा रही है और परिस्थिति अनुकूल होते ही झील का जल निकासी कार्य शुरू किया जाएगा।
लोगों ने इसके लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए नारेबाजी की। ग्रामीणों के आक्रमक रुख को देखकर प्रशासन के भी हाथ पैर फूल गए। राफ्ट से ग्रामीणों के बीच पहुंचे डीए, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष को भी आपदा प्रभावितो के भारी विरोध को झेलना पड़ा। डीएम ने झील को जल्द खोलने और हर संभव सहायता दिए जाने का आश्वास दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को स्यानाचट्टी चट्टी में बनी झील से जल निकासी के लिए जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए चैनेलाइजेशन करने के लिए समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
भवनों को खाली कराकर करीब 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। झील की लंबाई लगभग 400 मीटर, चौड़ाई 50 मीटर और गहराई पांच मीटर बताई जा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से यात्रियों को विभिन्न पड़ावों पर रोका गया है।