बिजनेस

लोगों को लगी महंगाई की मार, गैस सिलेंडर की कीमत में हुई 16.50 रुपये की बढ़ोतरी

अब 1,818.50 रुपये में मिलेगा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर

विमान ईंधन की कीमत में 1.45 प्रतिशत की हुई वृद्धि 

नई दिल्ली महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव खत्म होते ही लोगों को महंगाई की मार लगी है। तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक (कमर्शियल) एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव कर दिया है। इसके मद्देनजर 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 16.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ी हुई कीमतें आज यानी रविवार से ही लागू हो गई हैं। बढ़ी कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में आज से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर खुदरा बिक्री मूल्य 1,818.50 रुपये में मिलेगा। 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडर की कीमतों में भी चार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

तेल कंपनियों ने वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत भी 16.50 रुपये बढ़ाकर 1,818.50  रुपये प्रति 19 किलोग्राम सिलेंडर कर दी। यह वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतों में लगातार पांचवी मासिक वृद्धि है। इससे पहले बीते महीने भी 19 किलो के वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की दरों में 62 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। एक अक्टूबर को 48.5 रुपये की बढ़ोतरी से इसकी कीमत 1,740 रुपये हो गई थी। इससे पहले कीमत में एक अगस्त को 6.5 रुपये प्रति सिलेंडर और एक सितंबर को 39 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। शादियों के सीजन में इस मूल्य वृद्धि का असर उन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और छोटे व्यवसायों पर असर पड़ सकता है। जो एलपीजी पर बहुत अधिक निर्भर हैं। कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे परिवारों को कुछ राहत मिली है।  

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के रुझान के मुताबिक विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में रविवार को 1.45 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई। विक्रेताओं के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमत 1,318.12 रुपये प्रति किलोलीटर या 1.45 प्रतिशत बढ़कर 91,856.84 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई। जेट ईंधन की कीमतों में यह लगातार दूसरी मासिक वृद्धि है। 1 नवंबर को दरों में 2,941.5 रुपये प्रति किलोलीटर (3.3 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की गई थी। यह वृद्धि दो दौर की कटौती के बाद की गई है, जिससे दरें इस साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।

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